प्रगती की राह पर चल पड़े सर उठा कर
राहें मुश्किल भी थी तो भी अपनाई हमने
कुछ दोस्त मिले कुछ अपने
लगता है जैसे बहुत साथ हैं हमारे
लगता है जैसे बहुत साथ हैं हमारे
कुछ साथ चलते चलते आगे बढ़ गए
कुछ साथ चलते चलते कहीं खो गए
कुछ आगे बढ़ने की दिशा दिखा रहे थे
बहुत आगे से पीछे धक्का लगा रहे थे
इस भेड़ चाल में कब केकड़े चले आये पता भी न चला
साथियों की सोच का नया पड़ाव पता ही न चला
हम आगे जा रहे हैं की पीछे रह गए
गौर किया तो हम अकेले ही खड़े रह गए
गौर किया तो हम अकेले ही खड़े रह गए
शायद वहीं जहाँ से
प्रगती की राह पर चल पड़े थे सर उठा कर