बीत गया एक माहएक युग को बीते
वोह पल फिर लौट आया
जब धरती फटी पैरों तले
एक दृढ स्तंभ भिखर गया
एक शांत समुन्दर बिफर गया
एक उड़ता बादल बरस गया
एक हवा का झोंका ठहर गया
जब धरती फटी पैरों तले
कुछ भी तो नहीं बदला
सब शांत सा है पहले की तरह
दिल में अरमान हैं
मन में उम्मीदें हैं
होठों पर मुस्कान हैं
मैं भी तो वहीं खड़ी हूँ
उस घडी में खुद को कैद कर
जब धरती फटी पैरों तले
फटी धरती पर .............मुस्कुरा कर....