Sunday, 11 March 2012

जब धरती फटी पैरों तले

बीत गया एक माह
एक युग को बीते
वोह पल फिर लौट आया
जब धरती फटी पैरों तले


एक दृढ स्तंभ भिखर गया 
एक शांत समुन्दर बिफर गया 
एक उड़ता बादल बरस गया
एक हवा का झोंका ठहर गया 
जब धरती फटी पैरों तले


कुछ भी तो नहीं बदला
सब शांत सा है पहले की तरह
दिल में अरमान हैं
मन में उम्मीदें  हैं
होठों  पर मुस्कान हैं 
मैं भी तो वहीं खड़ी हूँ
उस घडी में खुद को कैद कर
जब धरती फटी पैरों तले


फटी धरती पर .............मुस्कुरा कर....