Wednesday, 1 February 2012

अलविदा मौसा

बहते  आंसू  थम गए...
हम काम में रम गए...
फिर भी दिल उदास है....
रह रह कर याद आ जाता है
वोह दिन बचपन का 
जब आप से मिलने 
चले आते थे हम 
घर पर आपके धमा चोकड़ी
 मचाते थे हम 
कुछ तो खास था जो संगत में आपकी
 मुस्कुराते  थे हम
आपका जाना यह सिखा गया
कोई नहीं अपना 
अपनों के सिवा 
कुछ नहीं रहता स्थिर 
यादों के सिवा 

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