अभी तो उठ के बैठे थे
चाय की चुस्कियों के साथ
अखबार ले हाथ
गुड मोर्निंग का सलाम किया था
एक पल में ऐसा क्या हुआ
जो साथ ही तोड़ गए
एक शुन्य पीछे छोड़ गए
थप्पड़ कीवोह गूँज गाल पर उंगलीयों के निशाँ
पहाड़े रटने की वोह अँधेरी रात
हर शुक्रवार को स्कूटर पर आगे झुक कर बेठना
हिंदी फिल्म देख सिज्जलर खाना
गर्मियों की छुट्टी में धोलपुर जाना
आपका न सुनना मेरा चिल्लाना
आपका गुस्सा होना मेरा मनाना
हर आशा पूरी करना
हर सिलवट को मिटाना
छोटी सी बात पर खुश हो जाना
कुछ न कहने पर भी
सब कुछ जान जाना
यह सब और बहुत कुछ और
जीवन का हिस्सा है ......पर इनको रचने वाले ने
मुहँ ही मोड़ लिया
तनहा छोड़ दिया
कितनी यादें साथ ले चलेगये
कितनी बातें अनकही छोड़ चले गए
उनका जीवन में योगदान है अंतहीन
उनकी यादें हैं अंतहीन
उनका जाना समझ न आया
यह ना समझी है अंतहीन
आपकी यादों को समेटे जीलेंगे हम
उस आसमान से हम पर नज़र ज़रूर रखना
इस अंतहीन शुन्य को आँसूं बन कर बहने ना देंगे हम
आपने में ही समेट कर हँसना सीख लेंगे हम....
चाय की चुस्कियों के साथ
अखबार ले हाथ
गुड मोर्निंग का सलाम किया था
एक पल में ऐसा क्या हुआ
जो साथ ही तोड़ गए
एक शुन्य पीछे छोड़ गए
थप्पड़ कीवोह गूँज गाल पर उंगलीयों के निशाँ
पहाड़े रटने की वोह अँधेरी रात
हर शुक्रवार को स्कूटर पर आगे झुक कर बेठना
हिंदी फिल्म देख सिज्जलर खाना
गर्मियों की छुट्टी में धोलपुर जाना
आपका न सुनना मेरा चिल्लाना
आपका गुस्सा होना मेरा मनाना
हर आशा पूरी करना
हर सिलवट को मिटाना
छोटी सी बात पर खुश हो जाना
कुछ न कहने पर भी
सब कुछ जान जाना
यह सब और बहुत कुछ और
जीवन का हिस्सा है ......पर इनको रचने वाले ने
मुहँ ही मोड़ लिया
तनहा छोड़ दिया
कितनी यादें साथ ले चलेगये
कितनी बातें अनकही छोड़ चले गए
उनका जीवन में योगदान है अंतहीन
उनकी यादें हैं अंतहीन
उनका जाना समझ न आया
यह ना समझी है अंतहीन
आपकी यादों को समेटे जीलेंगे हम
उस आसमान से हम पर नज़र ज़रूर रखना
इस अंतहीन शुन्य को आँसूं बन कर बहने ना देंगे हम
आपने में ही समेट कर हँसना सीख लेंगे हम....