दियों की जगमगाहट छाई चहूँ ओर
पटाकों की गूँज से थिरक उठी है वसुंधरा
हर मुख पे है हंसी
हर पग में है उत्साह
सब के हृदय में भर रही है सफलता की किरण यह रौशनी
उन्नति की धूम यह गूँज
इसी रौशनी ने छिपा रखा है कई घरों का अँधियारा
इसी गूँज में डूबी हैं कई सिसकियाँ
इन खुशियों के आँगन में कुछ पड़ाव ऐसे भी हैं
जहाँ न गूँज है न रौशनी
इस ख़ुशी में जी रहे हैं वहां के परिंदे
कि उनकी झोपडी जगमग है
हवेलियों की रौशनी से
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