Friday, 7 October 2011

बहे जा रहा है जीवन मेरा


समुन्दर की लहरों की तरह

उठता गिरता

हिचकोलों के बीच

तट से मिलता बिछड़ता

रात  में ठण्ड से सकपकाता

दिन में तपता....तेज़ से जगमगाता

हर गम हर ख़ुशी को खुद में समेटे

बहे जा रहा है जीवन मेरा

बहे जा रहा है जीवन मेरा





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